Sunday, August 14, 2011

स्वतंत्र दिवस के पावन पर्व पर स्वर्गीय इकबाल जी के बह्र में दो ग़ज़लें- पुरुषोत्तम अब्बी "आज़र "

स्वतंत्र दिवस के पावन पर्व पर स्वर्गीय इकबाल जी के बह्र में यह ग़ज़लें पेश-ए-खिदमत हैं !

सारे जहाँ  से  अच्छा  हिन्दुस्तां हमारा
मफ़ऊलु ,फ़ाइलातुन , मफ़ऊलु .फ़ाइलातुन
2   2  1   2  1  2  2     2    2 1   2  1  2 2
                        















                               १
अपने वतन की ख़ुशबू ,फैली है कुल जहाँ में
रौशन हुए हैं   तारे,  धरती  के   आसमाँ  में

हर पत्ता है अनूठा,हर गुल की छवि निराली
सौ रंग के ये   बूटे हैं,  किसके गुलसिताँ में

धामे   हुए हैं  सब ही,  इक दूसरे के बाज़ू
चेहरे  अलग- अलग हैं,वैसे  तो  कारवाँ   में

इतिहास की जबाँ पर,ज़िंदा रही है अब तक
इक  दास्ताँ  हमारी.  दुनिया  की  दास्ताँ  में

नादान हैं वो  "आज़र"  जो जानते   नहीं   हैं
यदि  शँख  में है जादू, तो  रंग  हैं   अजाँ में

                               २
अपने लहू से सींचो ,अब प्यार के चमन को
जड़ से उखाड़ फेंको ,तुम नफरतों के वन को

ये  विश्व   है   तुम्हार ,ये   विश्व  है  तुम्ही से
धरती को जगमगाओ ,रौशन करो गगन को

माना है काम मुश्किल ,पर कर सको तो कर लो
खुद को बदल के   देखो, पूरा   करो    वचन को

धरती पे बोझ बन कर ,जीने से क्या है हासिल
कुर्बान हक़ पे करदो ,मिटटी  के  तन- बदन को

चमकेगा तू भी "आज़र" ,तारों  के  साथ नभ में
चुप-चाप सह सका गर जीवन की हर तपन  को

 








आभार
आपका अपना
पुरुषोत्तम अब्बी "आज़र

6 comments:

नीरज गोस्वामी said...

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

नादान हैं वो "आज़र" जो जानते नहीं हैं
यदि शँख में है जादू, तो रंग हैं अजाँ में
***
धरती पे बोझ बन कर ,जीने से क्या है हासिल
कुर्बान हक़ पे करदो ,मिटटी के तन- बदन को

वाह...बेजोड़ ग़ज़लें...हर शेर बेहतरीन.

नीरज

सुलभ said...

वाह..!!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

नादान हैं वो "आज़र" जो जानते नहीं हैं
यदि शँख में है जादू, तो रंग हैं अजाँ में...
यादों में बस जाने वाला शेर...
दोनों ग़ज़लें बेहद उम्दा...बधाई
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

Rachana said...

इतिहास की जबाँ पर,ज़िंदा रही है अब तक
इक दास्ताँ हमारी. दुनिया की दास्ताँ में
bahut khub
ek ek sher moti hai .
rachana

सुभाष नीरव said...

बहुत खूब…हर शेर मोती सा है…

Purshottam Abbi 'Azer' said...

आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया
आज़र

Post a Comment

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए कोटिशः धन्यवाद और आभार !
कृपया गौर फरमाइयेगा- स्पैम, (वायरस, ट्रोज़न और रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त) टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन ना चाहते हुवे भी लागू है, अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ पर प्रकट व प्रदर्शित होने में कुछ समय लग सकता है. कृपया अपना सहयोग बनाए रखें. धन्यवाद !
विशेष-: असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।

About this blog

आखर कलश पर हिन्दी की समस्त विधाओं में रचित मौलिक तथा स्तरीय रचनाओं को स्वागत है। रचनाकार अपनी रचनाएं हिन्दी के किसी भी फोंट जैसे श्रीलिपि, कृतिदेव, देवलिस, शुषा, चाणक्य आदि में माईक्रोसोफट वर्ड अथवा पेजमेकर में टाईप कर editoraakharkalash@gmail.com पर भेज सकते है। रचनाएं अगर अप्रकाशित, मौलिक और स्तरीय होगी, तो प्राथमिकता दी जाएगी। अगर किसी अप्रत्याशित कारणवश रचनाएं एक सप्ताह तक प्रकाशित ना हो पाए अथवा किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त ना हो पाए तो कृपया पुनः स्मरण दिलवाने का कष्ट करें।

महत्वपूर्णः आखर कलश का प्रकाशन पूणरूप से अवैतनिक किया जाता है। आखर कलश का उद्धेश्य हिन्दी साहित्य की सेवार्थ वरिष्ठ रचनाकारों और उभरते रचनाकारों को एक ही मंच पर उपस्थित कर हिन्दी को और अधिक सशक्त बनाना है। और आखर कलश के इस पुनीत प्रयास में समस्त हिन्दी प्रेमियों, साहित्यकारों का मार्गदर्शन और सहयोग अपेक्षित है।

आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचनाकार की रचना व अन्य सामग्री की कॉपी करना अथवा अपने नाम से कहीं और प्रकाशित करना अवैधानिक है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं की होगी जिसने सामग्री कॉपी की होगी। अगर आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचना को प्रयोग में लाना हो तो उक्त रचनाकार की सहमति आवश्यक है जिसकी रचना आखर कलश पर प्रकाशित की गई है इस संन्दर्भ में एडिटर आखर कलश से संपर्क किया जा सकता है।

अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी एवं सुझाव हेतq editoraakharkalash@gmail.com पर सम्‍पर्क करें।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...