Monday, August 8, 2011

नज़्म- भरत तिवारी



एक मीठी मुस्कान ले आना
जब आना तुम......

भरत तिवारी
जीने के अरमान ले आना
जब आना तुम......

धूल सनी डायरी तुम्हे ही सोंचती होगी
कुछ गीत ग़ज़ल कुछ शेर नज़्म ले आना
जब आना तुम......

करके बसेरा है पसरा गहरा ठंडा सन्नाटा
बेपरवाह हँसी, लबों की गर्माहट ले आना
जब आना तुम......

मंदिर मस्जिद गिरजों मे तो मिले नहीं
ढूँढ के जो मिल जायें भगवान ले आना
जब आना तुम......

साथ नहीं है देता वक्त और वक्त के लोग
बढ़ती सी इस उम्र का चैन आराम ले आना
जब आना तुम......

है हमसे मजबूत हमारे रिश्ते की बुनियाद
इस दुनिया की खातिर कोई नाम ले आना
जब आना तुम......

समय रुका है जहाँ छोड़ के गये थे तुम
गये वक्त मे देना था जो प्यार ले आना
जब आना तुम......

साँसें घुटती हैं अब ईंट की छत के नीचे
छोटा सा आँगन और पेड़ की छाँव ले आना
जब आना तुम......

एक ज़माना गुज़रा सुने हुए दिल को
'भरत' की गुम धड़कन को भी ले आना
जब आना तुम......

23 comments:

Travel Trade Service said...

समय रुका है जहाँ छोड़ के गये थे तुम
गये वक्त मे देना था जो प्यार ले आना .
साँसें घुटती हैं अब ईंट की छत के नीचे
छोटा सा आँगन और पेड़ की छाँव ले आना !!!!!!!!!waah ...वेसे उनकी शब्दों की रचना जीवन के sakartmak पहलुओं को दिखाती हुई हुआ karti है ...मैने काफी उनकी रचनाये देखि आज कल dikhti नहीं है ....कई समय बाद आज दिखी है ....इंसानी jijivesha ..और कश्म कश के बीच एक sakaratmak पहलु hamenshan ubharta हुआ हुआ करता है bhart bhai की paktiyon में ...shukriya ji !!!!!!!.Nirmal Paneri

Rachana said...

मंदिर मस्जिद गिरजों मे तो मिले नहीं
ढूँढ के जो मिल जायें भगवान ले आना
जब आना तुम......
bahut sunder pura geet man ko mohne wala hai gahre bhavo liye huye
rachana

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

अच्छी रचना है.

देवेश प्रताप said...

लाजवाब प्रस्तुति ......

suman verma said...

bahut bhavnatmak abhivyakti hai.....bahut sunder...

anu said...

साँसें घुटती हैं अब ईंट की छत के नीचे
छोटा सा आँगन और पेड़ की छाँव ले आना
जब आना तुम......

waah.......bahut khub

intoo ke maakan mei ab dam bhi ghutne ko hai ...anu

Dr (Miss) Sharad Singh said...

खूबसूरत रचना ....

Saurabh said...

इस भाव-प्रवण रचना के लिये भरत भाई बहुत-बहुत बधाई. भावनाओं को जीने में कोई गणित काम नहीं आता. प्रस्तुत प्रविष्टि इस बात की ताकीद करती है.

भरत, आशा बँधी है. मेरी एक गुजारिश तुमसे -

दीखें बिखरे शब्द निरर्थक, जिनकी रीढ़ नमी हुयी है
जबभी लिखना रिश्ते कहना, मुट्ठी भरकर ले आना..
जब आना तुम...


-- सौरभ पाण्डेय, नैनी, इलाहाबाद (उ.प्र.)
.

pravesh soni said...

साँसें घुटती हैं अब ईंट की छत के नीचे
छोटा सा आँगन और पेड़ की छाँव ले आना
जब आना तुम......
achhi najm hai ....badhai

Rajeev Sahay said...

Bhrat Bhai,,
Aapki Lekhni Utkrist Shaili Ki Hai. Bahot Hi Seasoned Lekhak Hain aap..
Iss Nazm Me Jivan Ka Ek DARSHAN Hai jo Baar Baar Padhne KO Prerit Karta Hai..
AAshirvaad.

Rajeev Sahay said...

Bhrat Bhai,,
Aapki Lekhni Utkrist Shaili Ki Hai. Bahot Hi Seasoned Lekhak Hain aap..
Iss Nazm Me Jivan Ka Ek DARSHAN Hai jo Baar Baar Padhne KO Prerit Karta Hai..
AAshirvaad.

Rajeev Sahay said...

Bhrat Bhai,,
Aapki Lekhni Utkrist Shaili Ki Hai. Bahot Hi Seasoned Lekhak Hain aap..
Iss Nazm Me Jivan Ka Ek DARSHAN Hai jo Baar Baar Padhne KO Prerit Karta Hai..
AAshirvaad.

vineet srivastava said...

bhai kya kahe.........
m tooooo small to comment on dis.... its realy awesome :)

meen said...

Hi,
THis is a heart touching poem..speachless lyrics :)

Saif Mahmood said...

bhai wah . . . . . labon ki garmaahat ka jawab nahin . . . . aap ne zindagi se mulaqaat kara di bhai . . . . aap se guzaarish hai ki is tarah ki hi nazmein (chhand mukt) likha karein . . .

Dr.Bhawna said...

समय रुका है जहाँ छोड़ के गये थे तुम
गये वक्त मे देना था जो प्यार ले आना
जब आना तुम......

bahut khub ! bahut2 badhai..

naSim said...

good work.........

Saba Se Ye Kah Do Ke Kaliyaan Bichhaae
vo Dekho, Vo Jaan-e-bahaar Aa Raha Hai
chura Le Gaya Jo, In Aankhon Ki Nindein
vahi Leke Dil Ka Qaraar Aa Raha Hai

be blessed

naSim....................... Poetry n Art

dr mrunalinni said...

SIMPLY SUPERRRRRRRRRRRRRRRB

DushyantSharma said...

बहुत सुंदर रचना है


मंदिर मस्जिद गिरजों मे तो मिले नहीं
ढूँढ के जो मिल जायें भगवान ले आना
जब आना तुम......


समय रुका है जहाँ छोड़ के गये थे तुम
गये वक्त मे देना था जो प्यार ले आना
जब आना तुम......

aroon said...

भरत जी... प्यार उन हदों से भी गुजरता है जब चाहने वाले की सूरत भगवान से मिलने लगती है..मन के देवता से कोई भी मनौती मांगी जा सकती है..
बहुत सुंदर नज़्म है मित्र....साधुवाद ...

santosh said...

काफी उम्मीदें हैं --आने वाले से ! बहुत बढ़िया भारत भाई ! उम्मीदों को हमेशा जवां ही रहना चाहिए ! सुन्दर भाव !

induravisinghj said...

भावों का अदभुत प्रदर्शन,दिल छू लिया इन भावों ने ऐसा लगा इतना सुंदर कुछ पढ़ा ही नहीं अरसे से...

niranjan dubey said...

मंदिर मस्जिद गिरजों मे तो मिले नहीं
ढूँढ के जो मिल जायें भगवान ले आना
जब आना तुम......


Bahut Hi achhi panktiyaan Lagi mujhe... Bahut khubsurat Najm hai

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