Saturday, July 9, 2011

अंजुमन-ए-ग़ज़ल - देवी नागरानी

ग़ज़लः १

घर की चौखट पार करने की घड़ी थी आ गयी
फैसले के बीच में बापू की पगड़ी आ गयी

प्यार उनका स्वार्थ मेरा दोनों ही थे सामने
बीच में दोनों के उनकी ख़ैरख़्वाही आ गयी

प्यार और कर्त्तव्य में बटवारा जब होने लगा
सामने तब अम्मा के चेहरे की झुर्री आ गयी

ओट में जिसके थी मैं बारिश से बचने के लिए
बनके मेरी मौत वो दीवार गीली आ गयी

बेज़मीरी के जो नक़्श- ए- पा थे मेरे सामने
कुछ विवशता उनपे चलने की मेरी भी आ गयी

झुक गया क्यों अक्ल और ईमान का पलड़ा वहाँ
सामने मुफ़लिस के जब भी भूख तगड़ी आ गयी

ज़िन्दगी की आपाधापी में झुलसते दिन रहे
ख़्वाबों को महकाने लेकिन रातरानी आ गयी
**

ग़ज़लः २

मिलके बहतीं है यहाँ गंगो- जमन
हामिए -अम्नो-अमाँ मेरा वतन

वो चमन देता नहीं अपनी महक
एक भी गद्दार जिसमें हो सुमन

अब तो बंदूकें खिलौना बन गईं
हो गया वीरान बचपन का चमन

दहशतें रक्साँ है रोज़ो-शब यहाँ
कब सुकूँ पाएंगे मेरे हमवतन

जान देते जो तिरंगे के लिये
उन शहीदों का तिरंगा है कफ़न

देश की ख़ातिर जो हो जाएं शहीद
ऐसे जाँ-बाज़ों को 'देवी' का नमन
**

ग़ज़लः  ३

इस देश से ग़रीबी हट कर न हट सकेगी
मज़बूत उसकी जड़ है, हिल कर न वो हिलेगी

धनवान और भी कुछ धनवान हो रहा है
मुफ़लिस की ज़िंदगानी, ग़ुरबत में ही कटेगी

चारों तरफ़ से शोले नफ़रत के उठ रहे हैं
इस आग में यक़ीनन, इन्सानियत जलेगी

नारों का देश है ये, इक शोर- सा मचा है
फ़रियाद जो भी होगी, वो अनसुनी रहेगी

सावन का लेना देना 'देवी' नहीं हैं इससे
सहरा की प्यास हैं ये, बुझकर न बुझ सकेगी
**
-देवी नागरानी


संक्षिप्त परिचय- देवी नागरानी
जन्म- 11 मई 1949 को कराची में
शिक्षा- बी.ए. अर्ली चाइल्ड हुड, एन. जे. सी. यू.
संप्रति- शिक्षिका, न्यू जर्सी. यू. एस. ए.।
कृतियाँ: ग़म में भीगी खुशी उड़ जा पंछी (सिंधी गज़ल संग्रह 2004) उड़ जा पंछी ( सिंधी भजन संग्रह 2007)
चराग़े-दिल उड़ जा पंछी ( हिंदी गज़ल संग्रह 2007)
प्रकाशन- प्रसारण राष्ट्रीय समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में गीत ग़ज़ल, कहानियों का प्रकाशन। हिंदी, सिंधी और इंग्लिश में नेट पर कई जालघरों में शामिल। 1972 से अध्यापिका होने के नाते पढ़ती पढ़ाती रहीं हूँ, और अब सही मानों में ज़िंदगी की किताब के पन्ने नित नए मुझे एक नया सबक पढ़ा जाते है। कलम तो मात्र इक ज़रिया है, अपने अंदर की भावनाओं को मन के समुद्र की गहराइयों से ऊपर सतह पर लाने का। इसे मैं रब की देन ही मानती हूँ, शायद इसलिए जब हमारे पास कोई नहीं होता है तो यह सहारा लिखने का एक साथी बनकर रहनुमा बन जाता है।

"पढ़ते पढ़ाते भी रही, नादान मैं गँवार
ऐ ज़िंदगी न पढ़ सकी अब तक तेरी किताब।

15 comments:

Udan Tashtari said...

तीनों ही गज़लें बहुत पसंद आई. देवी जी की गज़लों का यूँ भी कोई जबाब नहीं....

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

बेहद सुन्दर गजलें ..देवी नागरानी जी की

तिलक राज कपूर said...

सरल शब्‍दों में गहरी बात। खूबसूरत ग़ज़लें।
मिलके बहतीं है यहाँ गंगो- जमन
हामिए -अम्नो-अमाँ मेरा वतन
काश यही जज्‍़बा जिन्‍दा रहे। आमीन।

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (11-7-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

देवी नांगरानी जी की गज़लों से आखर कलश की शोभा बढ़ गई है … बधाई !

ana said...

bahut badhiya prastuti

pran sharma said...

DEVI NAGRANI KEE GAZALEN MAN KO CHHOTEE HAIN .
ACHCHHEE GAZALON KE LIYE UNKO BADHAAEE .

दिगम्बर नासवा said...

देवी जी की तीनों गज़लों का जवाब नहीं ...
जादू है उनकी कलम में ...

Rachana said...

प्यार और कर्त्तव्य में बटवारा जब होने लगा
सामने तब अम्मा के चेहरे की झुर्री आ गयी
bahut khub
sari gazlen ek se badh ke ek hain
aap ko padhna sadev achchha lagta hai
saader
rachana

Rajesh Kumari said...

bahut hi achchi ghazals hain.aapka abhaar

डा० व्योम said...

बहुत अच्छा लगा आपके ब्लाग पर आकर। राजस्थान में कई वर्षों तक रहा हूँ।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

तीनों ही गज़लें लाजवाब हैं....

नीरज गोस्वामी said...

दीदी नागरानी जी को सुनना और उनकी ग़ज़लें पढना एक ऐसा अनुभव है जिस से बार बार गुजरने को जी करता है...वात्सल्य की मूर्ती दीदी अपने आस पास के माहौल, गिरती सामाजिक व्यवस्थाएं और बदलते मूल्यों से कितनी चिंतित हैं ये उनकी ग़ज़लें पढ़ कर समझा जा सकता है...अपनी पीड़ा को उन्होंने सार्थक शब्द दिए हैं जो हमें सोचने पर मजबूर करते हैं...उनके अमेरिका चले जाने के बाद मुंबई की नाशिश्तों से रौनक ही चली गयी है...वो जहाँ रहें खूब खुश रहें बस ये ही दुआ करता हूँ.

नीरज

manukavya said...

बेज़मीरी के जो नक़्श- ए- पा थे मेरे सामने
कुछ विवशता उनपे चलने की मेरी भी आ गयी

बहुत सुन्दर ग़ज़लें... एक-एक शेर लाजवाब..

naresh said...

Devi Nagrani ji Aap ki bhut hi payri or sunder rachnayo ko pedha.Aap ki Ek Ek GAZAL K Bhitter bhut hi Gheri baat chupi h. Aap n Is Naro k desh ka bhut hi khub chitren kiya h.Aap m kamal ki Urja h,jo kuch sochne ko majbur kreti h.

Post a Comment

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए कोटिशः धन्यवाद और आभार !
कृपया गौर फरमाइयेगा- स्पैम, (वायरस, ट्रोज़न और रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त) टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन ना चाहते हुवे भी लागू है, अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ पर प्रकट व प्रदर्शित होने में कुछ समय लग सकता है. कृपया अपना सहयोग बनाए रखें. धन्यवाद !
विशेष-: असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।

About this blog

आखर कलश पर हिन्दी की समस्त विधाओं में रचित मौलिक तथा स्तरीय रचनाओं को स्वागत है। रचनाकार अपनी रचनाएं हिन्दी के किसी भी फोंट जैसे श्रीलिपि, कृतिदेव, देवलिस, शुषा, चाणक्य आदि में माईक्रोसोफट वर्ड अथवा पेजमेकर में टाईप कर editoraakharkalash@gmail.com पर भेज सकते है। रचनाएं अगर अप्रकाशित, मौलिक और स्तरीय होगी, तो प्राथमिकता दी जाएगी। अगर किसी अप्रत्याशित कारणवश रचनाएं एक सप्ताह तक प्रकाशित ना हो पाए अथवा किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त ना हो पाए तो कृपया पुनः स्मरण दिलवाने का कष्ट करें।

महत्वपूर्णः आखर कलश का प्रकाशन पूणरूप से अवैतनिक किया जाता है। आखर कलश का उद्धेश्य हिन्दी साहित्य की सेवार्थ वरिष्ठ रचनाकारों और उभरते रचनाकारों को एक ही मंच पर उपस्थित कर हिन्दी को और अधिक सशक्त बनाना है। और आखर कलश के इस पुनीत प्रयास में समस्त हिन्दी प्रेमियों, साहित्यकारों का मार्गदर्शन और सहयोग अपेक्षित है।

आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचनाकार की रचना व अन्य सामग्री की कॉपी करना अथवा अपने नाम से कहीं और प्रकाशित करना अवैधानिक है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं की होगी जिसने सामग्री कॉपी की होगी। अगर आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचना को प्रयोग में लाना हो तो उक्त रचनाकार की सहमति आवश्यक है जिसकी रचना आखर कलश पर प्रकाशित की गई है इस संन्दर्भ में एडिटर आखर कलश से संपर्क किया जा सकता है।

अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी एवं सुझाव हेतq editoraakharkalash@gmail.com पर सम्‍पर्क करें।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...