सजनवा हमारे
नयन बाण मारे
हम लजात जात
वो हँसत जात
जिया मा हिलोर उठत जात
सा रा रा रा ........
होली का हुडदंग
जागे मन मा तरंग
सजनवा को रंग डारूं
नयन कटार मारूं
पानी में डुबाय डारूं
मन की सब निकार डारूं
होरी के बहाने
सजना को रंग डारूं
सा रा रा रा ................ - वन्दना गुप्ता
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ॐ श्री गणेशाय नमः ! या कुंदेंदु तुषार हार धवला, या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणा वरदंडमंडितकरा या श्वेतपद्मासना | याब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवै सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निश्शेषजाढ्यापहा ||
टुकड़े- टुकड़े में बंटी मैं
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रिश्ते थे या कर्तव्यों की हिदायतें
विभक्त सी मैं - खुद को भी अब ना पहचानूँ !
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*रश्मि प्रभा *
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एक कविता
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**बात री बात**
बात री कांईं बात
बात री कांईं बिसात
बात बात में
बात री बात चलै
... बात बात में बात टळै
बाकी रैवै बात
बाकी बात सारु
फेर बात टुरै
बात फुरै
बात ...
नसीम साकेती की रचनाएँ
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खेत में भूख उगे फाकों के अंकुर फूटें, क्या इसी वास्ते खूनों से धरा सींची
थी, ऐ मेरे देश के नेताओं बताओ इतना, क्या नए देश की तस्वीर यही खींची थी,अपने आग भरे...
राजस्थानी कवितावां
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तीन नानी नानी कवितावां
(१)
बिंदी
मिनख अर पाना सूं
सांगो पांग सगपन करती !
(२)
रेखावा जीवन अर जीवन रे बारे री
खासम ख़ास व्याकरण !
(३)
इछावां
जीवन अर साग...