शाहिद अख्‍तर की दो कविताएँ
















चंद शब्‍दों से नहीं बनती है कविता

महज चंद शब्‍दों और चंद बिंबों से
नहीं बनती है कविता
कविता कोई भात नहीं
कविता कोई सब्‍जी नहीं
कि शब्‍दों को धोया
बिंबों का मसाला डाला
और चढ़ा दिया भावनाओं के
चूल्‍हे की आंच पर।
कविता भिन्‍न है
बहुत भिन्‍न है
आप अगर चाहते हैं
उसे किसी फार्मुले में बांधना
तो कोई ठीक नहीं कि वह तोड़ दे बंधन
कोई हैरत नहीं कि आप कहना चाहें कुछ
और वह कह दे कुछ और बातें

आखिर जब महंगाई आसमान पर हो
और शहर पर भूख का शासन
और हर तरफ मचा हो हाहाकार
शब्‍द और कविता
किसी अभिनेत्री के नितंबों का
राग तो अलाप नहीं सकती
उनके कमनीय कुचों का
गुणगान तो नहीं कर सकती
महज चंद शब्‍दों और चंद बिंबों से ...

---
तितलियाँ

रात सोने के बाद
तकिए के नीचे से सरकती हुई
आती हैं यादों की ति‍तलियां
तितलियां पंख फड़फड़ाती हैं
कभी छुआ है तुमने इन तितलियों को
उनके खुबसूरत पंखों को
मीठा मीठा से लमस हैं उनमें
एक सुलगता सा एहसास
जो गीली कर जाते हैं मेरी आंखें

तितलियां पंख फड़फड़ती हैं
तितलियां उड़ जाती हैं
तितलियां वक्‍त की तरह हैं
यादें छोड़ जाती हैं
खुद याद बन जाती हैं

तितलियां बचपन की तरह हैं
मासूम खिलखिलाती
हमें अपनी मासुमियत की याद दिलाती हैं
जिसे हम खो बैठे हैं जाने अनजाने
चंद रोटियों के खातिर
जीवन के महासमर में...
हर रात नींद की आगोश में
जीवन के टूटते बिखरते सपनों के बीच
मैं खोजता हूं
अपने तकिये के नीचे
कुछ पल बचपन के, कुछ मासूम तितलियां...
***
शाहिद अख्‍तर
पीटीआई-भाषा, नई दिल्‍ली में वरिष्‍ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत

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18 Responses to शाहिद अख्‍तर की दो कविताएँ

  1. शाहिद अखतर की कवितायें छापने के लिये आखर कलश को सलाम...कविता की समकालीन संदर्भों मे व्याख्या करती है पहली कविता..जिस कविता में जीवन का दर्प नहीं वह कविता कैसे हो सकती है..छलावा हो सकता है और छलावा करने वाले को जादुगर कहा जाता है कवि नहीं.
    इस सुंदर परिभाषा के लिए और तितली की महत्ता..संकर जीवन की गलियों मे पीछे छूटते जा रहे मासूम स्वप्न, जिदंगी की सादगी और उसे टटोलती तितली की ख्वाईश..एक अच्छी काव्याभिव्यक्ति है. बधाई स्वीकार करें.
    सादर

    ReplyDelete
  2. दोनों कवितायेँ बहुत उम्दा! आखर कलश की प्रतिष्ठा के अनुरूप ! यादों की तितलियाँ.. नया बिम्ब है... कविता के सृजन प्रक्रिया का दर्द बहुत सहजता से व्यक्त किया गया है! अदभुद !

    ReplyDelete
  3. अच्छी साज - सज्जा के साथ अच्छी कविताएं

    बधाई नरेन्द्रजी , सुनीलजी और शाहिद अख्‍तरजी को !
    …लेकिन , मात्राओं सहित शिल्पगत सावधानियां भी रखी जा सकतीं तो और अच्छा रहता ।
    शुभकामनाओं सहित …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  4. सपनो में मै खो जात हूं
    रंग बिरंगी आती तितली
    छूने को फ़िर मन करता है
    उसकी सुंदर पंखडियों को
    मीठा-मीठा लमस है उसमें
    और सुलगता अपनापन भी
    आंखे मेरी गीली होतीं
    यादें उसकी रहती मन में
    बचपन होता तितली जैसा
    यादें मेरी ताजा होती
    जीवन टूटे पंखो जैसा
    मैं खुद खोजूं हूं बचपन को

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  5. दोनों कविताएं बहुत पसंद आई
    लेखक के साथ साथ आपको भी बधाई.

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  6. तितलियां वक्‍त की तरह हैं
    यादें छोड़ जाती हैं
    खुद याद बन जाती हैं

    SACH !

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  7. kavita ka ras inmai bhi kam samaj pada meri budhi moti hai...ha

    ReplyDelete
  8. अच्छा है...भाषा की खबरों से कविता की भाषा तक का सफर...बधाई...सही कहा आपने उस्ताद...कविता में हमारा पसीना, हमारी गंदगी, हमारे पेशे की गंध...सब कुछ होना चाहिए...और ऐसी कविता के लिए जरूरी भाव-शिखर तक पहुंचना दाल-भात पकाने का मामला नहीं है...

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  9. badhia.........shandaar prastuti......

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  10. khoobsurat kavitaen h...
    shahid ji ko badhai...
    aakhar kalash bhi is chayan hetu saadhuwad ka paatr h..

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  11. बेहतरीन प्रस्तुति॥कविता करना भिन्न है ,बहुत भिन्न॥बधाई॥

    ReplyDelete
  12. बेहतरीन प्रस्तुति...वाकई॥कविता करना दाल,,भात पकाने जैसा नहीं...बधाई॥

    ReplyDelete
  13. शाहिद साहब की कविताओं से गुज़रना एक तरह से विडंबनाओं, घटियापन, पाखंड, मौकापरस्ती से भरे मध्यवर्गीय समाज में किसी संवेदनशील और ईमानदार व्यक्ति की साफ़गोई को जानना है.जहां दुःस्वप्न भरी अकेलेपन की उदासी है ।
    इसे पढ़ें:
    अथ भारतीय खेल कथा द्वारा ईशान http://hamzabaan.blogspot.com/2010/07/blog-post_28.html

    शहरोज़

    ReplyDelete
  14. कविता और तितलियों की बात करती हुई शानदार कवितायेँ !!!!!!!!!!!!
    कवि को ढेर सारी शुभकामनाएं ..........

    ReplyDelete
  15. कविता और तितलियों की बात करती हुई शानदार कवितायेँ !!!!!!!!!!!!
    कवि को ढेर सारी शुभकामनाएं ..........

    ReplyDelete
  16. काफी बेहतर लिखा है भाई ने, बहुत बहुत बधाई..

    ReplyDelete

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