माधव नागदा की कविता - बचा रहे आपस का प्रेम


रचनाकार परिचय
नामः माधव नागदा
जन्मः २० दिसम्बर १९५१, नाथद्वारा(राजस्थान)
शिक्षाः एम.एस.सी. रसायन विज्ञान, बी.एड.
लेखन विधाएं: कहानी, लघुकथा, कविता, डायरी
प्रकाशनः सारिका, धर्मयुग, हंस, वर्तमान साहित्य, मधुमती, जनसत्ता, सबरंग, सम्बोधन, समकालीन भारतीय साहित्य, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, नवभारत टाईम्स, चर्चा, आदि।
पत्र-पत्रिकाओं तथा सौ से अधिक संकलनों मे कहानियां प्रकाशित।
प्रकाशित पुस्तकें: कहानियाँ:- १.उसका दर्द, २.शापमुक्ति, ३. अकाल और खुशबू।
लघुकथाएं: १. आग, २. पहचान (सम्पादित)
राजस्थानी भाषा मेः- १. उजास (कहानी संग्रह), २. सोनेरी पाँखां  वाळी तितळियाँ (डायरी)
विशेषः ‘‘उसका दर्द’’ राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत।
अन्तर्राष्ट्रीय विश्व शान्ति प्रबोधक महासंघ द्वारा राष्ट्रीय हिन्दी सेवी सहस्त्राब्दी सम्मान।
राजस्थान पत्रिका सृजनात्मक पुरस्कार (कविता- ठहरा हुआ वक्त के लिये)
सोनेरी पाँखां वाळी तितळियाँ- राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा पुरस्कृत साकेत- साहित्य सम्मान, कहानियां क* भारतीय भाषाओं मे अनूदित
सम्प्रतिः व्याख्याता (रसायन), श्रीगोवर्धन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नाथद्वारा-३१३३०१(राज
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एक विचार अमूर्त सा
कौंधता है भीतर
कसमसाता है बीज की तरह
हौले हौले
अपना सिर उठाती है कविता
जैसे
फूट रहा हो कोई अंखुआ
धरती को भेद कर;
तना बनेगा
शाखें निकलेंगी
पत्तियां प्रकटेंगी
एक दिन भरा-पूरा
हरा-भरा
पेड.बनेगी कविता।
कविता पेड. ही तो है
इस झुलसाने वाले समय में
कविता सें इतर
छाँव कहाँ
सुकून कहाँ
यहीं तो मिल बैठ सकते हैं
सब साथ-साथ
चल पडने को फिर से
तरो ताजा हो कर।
                                                  
लकडहारों को
नहीं सुहाती है कविता
नहीं सुहाता है उन्हें
लोगों का मिलना जुलना
प्रेम से बोलना बतियाना
भयभीत करती है उन्हें
कविता के पत्तों की
खडखडाहट
इसीलिये तो वे घूम रहे हैं
हाथ में कुठारी लिये
हिंसक शब्दों के हत्थे वाली।
हमें
बचाना है कविता को
क्रूर लकडहारों से
ताकि लोग
बैठ सकें बेधडक
इसकी छांव में
ताकि बचा रहे
आपस का प्रेम
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12 Responses to माधव नागदा की कविता - बचा रहे आपस का प्रेम

  1. सुन्दर और सार्थक कविता !

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  2. कविता वास्तव में जिस अनुभूति का नाम है, उसकी पहचान इस रचना में गहराई के साथ मिलती है। बधाई।

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  3. विगत कुछ समय में पढ़ी श्रेष्‍ठ कविताओं में से एक। विषय पर निरंतर सटीक शब्‍दों की पकड़ बनाये विचार की निरंतर बहती काव्‍य-धारा।

    ReplyDelete
  4. सशक्त कथा हस्ताक्षर एवम् रसायनज्ञ भाई माधव नागदा की पढ़ कर सुखद अनुभूति हुई!आपकी डायरी एवम् कथाएं तो प्रभावित करती रहीँ है ।आज कविताओँ ने भी मन मोह लिया।अच्छी कविताओँ के लिए बधाई!

    ReplyDelete
  5. Madhav G ki kavita achi legi hai. Madhav G hindi shatiya jagat ke ek part hai. Aakhar kalash ke vajah se aaj Madhav G ki kavita ko pdhane ka moka mila.
    Thanks.
    Vyas & Gajjani Group

    ReplyDelete
  6. बचाना है कविता को
    क्रूर लकडहारों से...

    sahi kaha

    ReplyDelete
  7. आशावादी स्वर ने प्रभावित किया, कविता सत्य ही सत्य को उजागर करती है. अपनी कविता ' कविता सूरज है' स्मरण हो आई .

    ReplyDelete
  8. आप की इस रचना को शुक्रवार, 2/7/2010 के चर्चा मंच के लिए लिया जा रहा है.

    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.....कविता के जन्म की कहानी कहती हुई

    ReplyDelete
  10. एक मँजे हुए साहित्यकार की सधी हूई कविता ।रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

    July 2, 2010

    ReplyDelete

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