देवी नागरानी की एक ग़ज़ल

रचनाकार परिचय

देवी नागरानी का जन्‍म 11 मई 1949 को कराची (वर्तमान पाकिस्तान में) में हुआ और आप हिन्दी साहित्य जगत में एक सुपरिचित नाम हैं। आप की अब तक प्रकाशित पुस्तकों में "ग़म में भीगी खुशी" (सिंधी गज़ल संग्रह 2004), "उड़ जा पँछी" (सिंधी भजन संग्रह 2007) और "चराग़े-दिल" (हिंदी गज़ल संग्रह 2007) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई कहानियाँ, गज़लें, गीत आदि राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। आप वर्तमान में न्यू जर्सी (यू.एस.ए.) में एक शिक्षिका के तौर पर कार्यरत हैं।
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हैवानियत के सामने इन्सानियत झुके
सर शर्म से वहीं जो झुका दें तो ठीक है
है सूनी सूनी सोच, कंवारी भी है अभी
शब्दों से माँग उसकी सज़ा दें तो ठीक है
किस काम का उजाला जो बीनाई छीन ले
पलकों पे उसके परदा गिरा दें तो ठीक है
अपना ही चेहरा देख के होता है खौफ़-सा
टूटा वो आईना ही हटा दें तो ठीक है
सौदा हुआ तो क्या हुआ दो कौड़ियों के दाम
सस्ता इतना ख़ुद को बना दें तो ठीक है
नीदों के इंतज़ार में रातें गुज़र गई
आँखों में सोए ख़्वाब जगा दें तो ठीक है
क्या खुद ही ठूंस ठूंस के खाते हैं उम्र भर
भूखों को पेट भरके खिला दें तो ठीक है
वो आशना जो रहता है मुझसे ही बेख़बर
उस नामुराद को ही भुला दें तो ठीक है
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- देवी नागरानी

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16 Responses to देवी नागरानी की एक ग़ज़ल

  1. अपना ही चेहरा देख के होता है खौफ़-सा
    टूटा वो आईना ही हटा दें तो ठीक है....
    ये मोहतरमा देवी नागरानी साहिबा के इल्मे-उरूज़ की बुलंदी का दस्तावेज़ है. ग़ज़ल का हर शेर दिल को छू जाता है.

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  2. DEVI NANGRANI JEE KEE GAZAL PADHNA BAHUT ACHCHHA
    LAGAA HAI.ACHCHHEE GAZAL KE LIYE UNHEN BADHAAEE.

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  3. देवी नागरानी जी सुपरिचित हस्‍ताक्षर हैं ग़ज़ल जगत में और उनके अशआर पर मैं कुछ कहूँ!

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  4. बहुत अच्छी गज़ल लगी जिंदगी के कई फलसफे बताती

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  5. Devi Naagrani ji ki qalam khud apna parichay deti hai..

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  6. नागरानी जी का नाम तो बहुत सुना था आज उनके काव्य से रुबरु होने का सौभाग्य मिला
    अच्छी गज़ल ......

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  7. Devi nagrani ji ki gazal achhi lagi.
    unhen badhai!
    *mere khayal se yahan gazal likhne walon ko ye kitab jaroor padhni chahiye-
    'URDU KAVITA OR CHHAND SHASTRA'
    lekhak-NARESH NADEEM
    sarans prakashan
    142-E poket-4
    mayur vihar,fez-1
    dilli-110091
    Rs.150/-

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  8. देवी नागरानी जी को पढता रह्ता हूँ.
    हर शेर ख़ास है.

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  9. Nagrani ji ko padhana sunana hamesha achcha lagta hai..saadar kulwant

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  10. Devi ji ke baare mein kuch kahna sooraj ko diya dikhaane jaisa hai ... vo ustaad hain is fun ki ...

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  11. sunder gazal... zindgi ki hakikat se rubaru karati

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  12. behtreen gazal,falsafe sachhe hai ,koi padke jindgi ko samjhe to sahi.........

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  13. किस काम का उजाला जो बीनाई छीन ले
    पलकों पे उसके परदा गिरा दें तो ठीक है

    दीदी की बाकी ग़ज़लों की तरह ये ग़ज़ल भी लाजवाब है...
    नीरज

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  14. bahut khoob , sachhi baaton aapne bakhubi , gazal ke andaaz mein bayan kiya hai........badhaii

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  15. Aap sabhi padne walon ki shukraguzaar hoon jo apne shabdon mein apna sneh samoya. mere prayaas k housla deti aap sabhi ki abhivyakti ke liye dhanyawaad.

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