आशा पाण्डे (ओझा) की रचनाएं


आशा पाण्डे (ओझा)
रचनाकार परिचय
नामः आशा पाण्डे (ओझा)  एडवोकेट (कवयित्री)
पिताः शिवचन्द ओझा
पति का नामः जितेन्द्र पाण्डे
जन्म तिथिः २५ अक्टूबर १९७०
जन्म स्थानः ओसियां
जिलाः जोधपुर (राजस्थान)
शिक्षाः एम.ए. एलएल. बी, हिन्दी साहित्य में आलोचना (शोधरत)
व्यवसायः वकालात
प्रकाशित सामग्रीः दो बूंद समुद्र के नाम (कविता संग्रह)
शीघ्र प्रकाश्यः एक कोशिश रोशनी की ओर (कविता संग्रह), जर्रे-जर्रे में वो है (कविता संग्रह), वक्त की शाख पर (कविता संग्रह), एक हाइकु संग्रह
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, गजल, व्यंग्य, आलेख, समीक्षाएं प्रकाशित
पुरस्कारः कवि तेज पुरस्कार २००७, राजकुमार रतनावती २००७
***************************************************************** 
माँ तुम

माँ तुम ममता का मूर्त रूप
तुम सतरंगी स्नेह-आँचल

तुम मंदिर प्रांगन सी पवित्र
तुम पावन-पुनीत गंगाजल

टेढा-मेढा विकट जीवन जगत
तुम सीधी-सादी सरल प्रांजल

छल, छद्म, कपट चारों तरफ
माँ तेरी गोदी निर्मल, निश्‍छल

पावक, अनल सामान जीवन
तुम चन्दन की छांया शीतल

तेरे आशीषों की ज्योत्सना से
पथ मेरा नित-नित उज्ज्‍वल

पाने तेरा वात्सल्य सोम-सुधा
जन्म-जन्म पी लूँ जीवन गरल

तेरी कोख पाने की अभिलाषा में
स्वयं-भू भी रहते आतुर प्रतिपल
***
इक ऐसा स्वर्णिम सवेरा होगा

इक ऐसा स्वर्णिम सवेरा होगा
फिर न कहीं कोई अँधेरा होगा

सूरज उगेगा ऐश्वर्य वैभव का
समृद्धि का घर-घर फेरा होगा

आनंद-उत्सव  की होंगी बस्तियां
चमकता हुआ हर चेहरा होगा

विषाद-वेदना जहां वर्जित होंगे
प्रहरी सुख प्रमोद का घेरा होगा

गूंजेगी ‘‘जय हो’’ की अनुगूंज
भाल पे कीर्ति का सेहरा होगा

उन्नति-प्रगति की होगी हरियाली
ऐसा सुन्दर भारत-वर्ष मेरा होगा

फिर चहकेगी सोने की चिडिया
उस दिन धन्य जीवन मेरा होगा
***
मैं परेशान हूँ

मैं परेशान हूँ क्योंकि वक्त परेशानी का है
मेरा नहीं मसला वतन की जिंदगानी का है

ये सुलगते मंजर, ये संवेदनाओं की खामोशी
वाकई मैं हैरान हूँ क्योंकि वक्त हैरानी का है

बैठे रहेंगे कब तक यूं मद कर अपनी आँखें
जगो! वक्त अब हर जर्रे पर निगरानी का है

ये खामोशी, ये अनजानापन आखिर कब तक
हटा दो मुंह से हाथ ये वक्त मुखर वाणी का है 

धुंधले हुए इतिहास के पृष्ठों पर रचे हुए हरूफ
वक्त को इंतजार अब इक नई कहानी का है
***

गरीब का जीवन

दर्दके ये समृद्ध महल,
रंजकी ऊँची दीवारें।
दुःखका रंग-रोगन सजा,
बंधी वेदनाओंकी बांदरवारें।
विपदाओंके बाग-बगीचे,
लगी करुणझूलों की कतारें।
आँसूके रिम-झिम सावन,
कसककी शीतल फुहारें।
चिंताओंके झाड-फानूस से,
सजतेघर के गलियारे
बेबसीके पलंग पे लेटी,
दुल्हन पीडाकी चित्कारें।
सूनेपनकी साँझ में आता,
दूल्हा मजबूरीघर-द्वारे।
दे अभावोंकी मंहगी मिठाई,
करते लाडलो की मनुहारें।
पा दुत्कारोंके खेल-खिलौने,
खिलती बच्चों की किलकारें।
रोज सजाते आँगन देहरी,
दीपक से आँहोंके अंगारे।
भूख परी सी छम-छम आती,
टिम-टिम करते टीसके तारे।
जब अरमानों का चूल्हाजलता,
मिल बैठ खाते गम सारे,
कंटक-प्रस्तरके कोमल बिस्तर,
बजती आल्हादित स्वप्न झँकारें।
अंधेरेलिखते जिनकी यश गाथा,
यही है गरीबका जीवन प्यारे।
*************
आशा पाण्डे (ओझा)
पताः ७८, गायत्री नगर
पाली-मारवाड - ३०६४०१
(राजस्थान)
ई-मेलः asha09.pandey@gmail.com , kavyatri_asha@yahoo.in

Posted in . Bookmark the permalink. RSS feed for this post.

28 Responses to आशा पाण्डे (ओझा) की रचनाएं

  1. धुंधले हुए इतिहास के पृष्ठों पर रचे हुए हरूफ
    वक्त को इंतजार अब इक नई कहानी का है

    वाह क्या खूब कही आपने !!
    काफी भाव पूर्ण रचना ..
    बधाई , स्वीकारें ||

    ReplyDelete
  2. charo hi rachanaayen bahut hi shandar hai ..... sabhi rachanaaon ne apani chhap chhodi hai ....... bahut badiyaa lekhan hai aapka aasha ji ..... shubhkamanayen.

    ReplyDelete
  3. आशा पांडे जी,
    आपकी चारोँ कविताएं बेहतरीन हैँ।
    बधाई!
    बस विवरणात्मकता से बचेँ।कुछ तो पाठक के लिए भी सोचने को छोड़ेँ।कवि द्वारा छोड़े संकेतो, प्रतीकोँ एवम् बिम्बोँ का पाठक पीछा कर निहितार्थ खोजता है तो वह रोमांचित होता है।यही कविता का आनंद भी है।
    शब्दो पर इतने इनवार्टेड कोमा लगाने की भी कहां दरकार है!

    ReplyDelete
  4. अच्छी ग़ज़लें, जो दिल के साथ-साथ दिमाग़ में भी जगह बनाती है।

    ReplyDelete
  5. अच्छी ग़ज़लें, जो दिल के साथ-साथ दिमाग़ में भी जगह बनाती है।

    ReplyDelete
  6. Sundar aur sahaj bhavabhivyakiti ke liye meree
    hardik badhaaee aur shubh kamna.

    ReplyDelete
  7. achchhi bhavpravan rachnaayen hain.. badhai Asha ji

    ReplyDelete
  8. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  9. वाह क्या खूब कही आपने !!
    काफी भाव पूर्ण रचना ..
    बधाई , स्वीकारें ||

    ReplyDelete
  10. आदरणीया आशा जी ,
    प्रणाम,
    मैने आपकी लिखी कविता पढ़ा और काफी प्रभावित हुआ, आशा जी यदि आप अनुमति दे तो मै आपकी कविता "माँ तुम","इक ऐसा स्वर्णिम सवेरा होगा" एवं अन्य को मेरे सोसल नेटवर्क वेबसाईट www.openbooksonline.com पर प्रकाशित कर दू जिससे ओपन बुक्स परिवार से जुडे सदस्य भी आपके कविताओ से लाभ उठा सके,
    आप के जबाब के इंतजार मे,
    गनेश जी
    ADMIN
    Open Books Online

    ReplyDelete
  11. विशाद-वेदना जहां वर्जित होंगे
    प्रहरी सुख प्रमोद का घेरा होगा
    प्रत्येक रचनाएं विविधता लिए हुए हैं, यह पंक्ति मुझे बहुत सहज और स्वाभाविक लगी, और दिल से मैं भी चाहा है

    ReplyDelete
  12. धुंधले हुए इतिहास के पृष्ठों पर रचे हुए हरूफ
    वक्त को इंतजार अब इक नई कहानी का है......
    really asha ji its a awesome lines.
    carry on you are good poet.

    ReplyDelete
  13. ये सुलगते मंजर, ये संवेदनाओं की खामोशी
    वाकई मैं हैरान हूँ क्योंकि वक्त हैरानी का है
    बहुत सुन्दर रचना है आशा जी. आपके नाम के अनुसार उम्मीद जगाती.

    ReplyDelete
  14. बहुत ही सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ शानदार रचना प्रस्तुत किया है जो काबिले तारीफ़ है! बहुत बहुत बधाई आशा जी!

    ReplyDelete
  15. मै आशा जी का प्रशंसक रहा हूँ क्योकि आशा जी अपने परिवेश के प्रति सजग व संवेदनशील कथाकार है। आप भाव व कथ्य दोनों स्तर पर सशक्त है ये उपर्युक्त रचनाओं से सुविदित है।

    ReplyDelete
  16. बहुत ही सुन्दर रचनाये है.. माँ सरस्वती का आशीर्वाद आशा जी पर बना रहे.

    ReplyDelete
  17. सभी रचनाएँ अच्छी लगी,धन्यवाद.

    ReplyDelete
  18. ॥ ऊँ पाठकाय नमः ॥
    आप सर्वशक्तिमान हैँ आप सर्वत्र विराजमान हैँ
    आप आदि हैँ
    अनंत हैँ
    आपकी लीला अपरम्पार है
    आप
    सातोँ समुन्दरोँ के इधर भी हैँ
    उधर भी हैँ
    आपकी की जद मेँ
    पत्रिका
    पुस्तक
    अखबार
    वेबसाइट
    ट्यूटर
    ओरकुट
    फेसबुक
    ब्लाग आदि
    सब आते हैँ
    आप जिसे चाहेँ
    उसे
    अर्श पर बिठा देँ
    जिसे न चाहेँ
    उसे
    फर्श पर लिटा देँ
    पाठकाभिमन्यू बन
    आपने
    चक्रव्यूह रुपी
    अन्तरजाल को
    कब का
    भेद डाला।
    हे लेखकहितकारी
    आपकी टिप्पणी
    सब को है प्यारी
    तुम पाठक हो
    पाठक ही रहना
    बस सुन लो
    अरज हमारी
    मत करना
    अतिक्रमण
    सिरजन का
    चाहे जो करना
    परन्तु
    रचना से बचना!

    ReplyDelete
  19. अच्छे प्रयास. लय तथा प्रवाह का ध्यान रखें.
    मेरी नयी रचनाओं हेतु divyanarmada.blogspot.com देखिये. अनुसरण करें, टिप्पणी दें, रचना दें. संपर्क: salil.sanjiv@gmail.com

    ReplyDelete
  20. Asha ji . apki kavitaoun main main mare bharat ki mitthi ki khushbu hi, aapki racnaoun main dard hai , carry on , namaskaar sweekar karien.

    ReplyDelete
  21. namaskar asha jee
    aaj aap ki 2 rachnaaye padhi maine
    maa tum aur gareeb ka jeewan
    dono hi rachnaao me gahri samvedna aur insaniyat ke prati dard aur samman ki bhaawna maine mehsuus kee.
    kripaya meri badhaayi sweekaar karen
    shashi bhushan
    director
    vikas buildtech private limited gorakhpur

    ReplyDelete
  22. aap ek mahan kawyatree ho jo aaj ke samy v samaj ko darpan ki tarh samne rakhati ho aap ki kavita uch koti ki hai

    ReplyDelete
  23. Thats realy Interestin.you have awesome quality to make Hindi poems.Good Spirit.Keep it up

    ReplyDelete
  24. जब ‘अरमानों का चूल्हा’ जलता,
    मिल बैठ खाते गम सारे,
    aasha jee namaskar, kya kabiletarif andaj hai aapke ,in lajabab rachnao ke liye mubarakbad kabul kare ........shukriya

    ReplyDelete
  25. bahut sunder rachna h aapki. badhaiyan.

    ReplyDelete
  26. AMULIY KAVITA HE KRAPIYA HAMESH ASE HI LIKANA ! MA KI MAMTA KE LIY BHADAI OM VIYAS KE BAD AAPANE MA KA MAHATV LIKHA HE ! BADHAI HO !( GANESHKHER@GMAIL.COM)

    ReplyDelete
  27. बहुत अच्छे गीत और गज़ल है आशा जी के ,गरीब के महल को दर्द ,रंज ,करुणा ,विपदा ,आंसू ,कसक ,से सजा कर ह्रदय स्पर्शी रचना का सृजन ,किया है .......ओम जी भाई की टिपण्णी ने तो मन मोह लिया

    ReplyDelete
  28. बहुत ही सुन्‍दर रचनाऐं है भावपूर्ण होने के साथ साथ सार्थकता के सुपथ्‍यगामी भी है

    ReplyDelete

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए कोटिशः धन्यवाद और आभार !
कृपया गौर फरमाइयेगा- स्पैम, (वायरस, ट्रोज़न और रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त) टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन ना चाहते हुवे भी लागू है, अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ पर प्रकट व प्रदर्शित होने में कुछ समय लग सकता है. कृपया अपना सहयोग बनाए रखें. धन्यवाद !
विशेष-: असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

About this blog

आखर कलश पर हिन्दी की समस्त विधाओं में रचित मौलिक तथा स्तरीय रचनाओं को स्वागत है। रचनाकार अपनी रचनाएं हिन्दी के किसी भी फोंट जैसे श्रीलिपि, कृतिदेव, देवलिस, शुषा, चाणक्य आदि में माईक्रोसोफट वर्ड अथवा पेजमेकर में टाईप कर editoraakharkalash@gmail.com पर भेज सकते है। रचनाएं अगर अप्रकाशित, मौलिक और स्तरीय होगी, तो प्राथमिकता दी जाएगी। अगर किसी अप्रत्याशित कारणवश रचनाएं एक सप्ताह तक प्रकाशित ना हो पाए अथवा किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त ना हो पाए तो कृपया पुनः स्मरण दिलवाने का कष्ट करें।

महत्वपूर्णः आखर कलश का प्रकाशन पूणरूप से अवैतनिक किया जाता है। आखर कलश का उद्धेश्य हिन्दी साहित्य की सेवार्थ वरिष्ठ रचनाकारों और उभरते रचनाकारों को एक ही मंच पर उपस्थित कर हिन्दी को और अधिक सशक्त बनाना है। और आखर कलश के इस पुनीत प्रयास में समस्त हिन्दी प्रेमियों, साहित्यकारों का मार्गदर्शन और सहयोग अपेक्षित है।

आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचनाकार की रचना व अन्य सामग्री की कॉपी करना अथवा अपने नाम से कहीं और प्रकाशित करना अवैधानिक है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं की होगी जिसने सामग्री कॉपी की होगी। अगर आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचना को प्रयोग में लाना हो तो उक्त रचनाकार की सहमति आवश्यक है जिसकी रचना आखर कलश पर प्रकाशित की गई है इस संन्दर्भ में एडिटर आखर कलश से संपर्क किया जा सकता है।

अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी एवं सुझाव हेत editoraakharkalash@gmail.com पर सम्‍पर्क करें।

Search

Swedish Greys - a WordPress theme from Nordic Themepark. Converted by LiteThemes.com.