सुरिन्दर रत्ती की एक नज़्म और एक कविता


सुरिन्दर रत्ती

रचनाकार संक्षिप्‍त परिचय
रचनाकार नाम: सुरिन्दर रत्ती
जन्म स्थान: मुंबई
शिक्षा: बी. कॉम मुंबई यूनिवर्सिटी 
संगीत, और लेखन में रूचि, कुछ गानों की रेकॉर्डिंग हुई थी वह रिलीज़ हो चुके हैं
सम्प्रत्ति: मुंबई में युनिवर्सल म्यूजिक में मेनेजर पद पर कार्यरत 
एक पुस्तक पर कार्य चल रहा है



******************************************************************************




उर्दू नज़्म "बदगुमानी"

वो शिकार हो गया है बदगुमानी का, 
वक़्त आया जैसे किसी की क़ुर्बानी का 
कुछ लोगों की होती अजीब हरकतें,
उम्दा सुबूत पेश करते नादानी का
खुद गुमराह हुए हैं या किये गए हैं,
एक अनोखा  सबब पाया परेशानी का
बदगुमां दमाग में रोज़न होने लगे,
बरपा बेमज़ा कहर शऊर मनमानी का
जाने  कैसे "रत्ती" तौफ़ीक़ ने पाँव पसारे
नया फुतूर देखा हैरतअंगेज़ कहानी का
शब्दार्थ 
बदगुमानी = गलत धारणा, गुमराह = पथभ्रष्ट 
सबब = कारण, बदगुमां = संशयी, रोज़न = छेद,   बरपा = उपस्थित
शऊर = तरीका,  तौफ़ीक़ = हिम्मत, शक्ति, फ़ूतूर = दोष
*******

कविता "उतावले शब्द"

सजल नयनों की भाषा
में थी एक अजीब निराशा,
निराशा में छुपा था एक सपना
अनदेखा दृश्य कुछ कहानियां, बातें,
और मस्तक की सिलवटों के पीछे नेत्र
जिनमें बसा था एक शहर 
सुनसान
उन अधरों पर थे कई उतावले शब्द 
जो पड़े रहे, अटके रहे 
कई दिनों, महीनों
मन बुद्धि  की राह तकते
उचित समय की बात जोहते
क़ैद होकर रह गए
मन की चारदिवारी में
भीतर के घमासान में 
पिसते-पिसते धूल हो गए  .....
 *******
- सुरिन्दर रत्ती - मुंबई 

Posted in . Bookmark the permalink. RSS feed for this post.

5 Responses to सुरिन्दर रत्ती की एक नज़्म और एक कविता

  1. उचित समय की बात जोहते
    क़ैद होकर रह गए
    मन की चारदिवारी में
    भीतर के घमासान में
    पिसते-पिसते धूल हो गए .....
    क्या खूब कही है ..सच-मुच उचित समय के इन्तजार में बहुत सी बातें दिल में ही दबी रह जाती है !

    ReplyDelete
  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  3. सुरिन्दर रत्ती नज्म एवं कविता दोनों ही काबिले तारिफ हैं।

    ReplyDelete
  4. `vakt jaise aaya kisi kurbani kaa'. bahut sundar abhivyakti.Badhai.

    ReplyDelete
  5. रत्ती जी की कविता प्रभावित करती है।

    ReplyDelete

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए कोटिशः धन्यवाद और आभार !
कृपया गौर फरमाइयेगा- स्पैम, (वायरस, ट्रोज़न और रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त) टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन ना चाहते हुवे भी लागू है, अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ पर प्रकट व प्रदर्शित होने में कुछ समय लग सकता है. कृपया अपना सहयोग बनाए रखें. धन्यवाद !
विशेष-: असभ्य भाषा व व्यक्तिगत आक्षेप करने वाली टिप्पणियाँ हटा दी जायेंगी।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

About this blog

आखर कलश पर हिन्दी की समस्त विधाओं में रचित मौलिक तथा स्तरीय रचनाओं को स्वागत है। रचनाकार अपनी रचनाएं हिन्दी के किसी भी फोंट जैसे श्रीलिपि, कृतिदेव, देवलिस, शुषा, चाणक्य आदि में माईक्रोसोफट वर्ड अथवा पेजमेकर में टाईप कर editoraakharkalash@gmail.com पर भेज सकते है। रचनाएं अगर अप्रकाशित, मौलिक और स्तरीय होगी, तो प्राथमिकता दी जाएगी। अगर किसी अप्रत्याशित कारणवश रचनाएं एक सप्ताह तक प्रकाशित ना हो पाए अथवा किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त ना हो पाए तो कृपया पुनः स्मरण दिलवाने का कष्ट करें।

महत्वपूर्णः आखर कलश का प्रकाशन पूणरूप से अवैतनिक किया जाता है। आखर कलश का उद्धेश्य हिन्दी साहित्य की सेवार्थ वरिष्ठ रचनाकारों और उभरते रचनाकारों को एक ही मंच पर उपस्थित कर हिन्दी को और अधिक सशक्त बनाना है। और आखर कलश के इस पुनीत प्रयास में समस्त हिन्दी प्रेमियों, साहित्यकारों का मार्गदर्शन और सहयोग अपेक्षित है।

आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचनाकार की रचना व अन्य सामग्री की कॉपी करना अथवा अपने नाम से कहीं और प्रकाशित करना अवैधानिक है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं की होगी जिसने सामग्री कॉपी की होगी। अगर आखर कलश में प्रकाशित किसी भी रचना को प्रयोग में लाना हो तो उक्त रचनाकार की सहमति आवश्यक है जिसकी रचना आखर कलश पर प्रकाशित की गई है इस संन्दर्भ में एडिटर आखर कलश से संपर्क किया जा सकता है।

अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी एवं सुझाव हेत editoraakharkalash@gmail.com पर सम्‍पर्क करें।

Search

Swedish Greys - a WordPress theme from Nordic Themepark. Converted by LiteThemes.com.