रश्मि प्रभा की कविता - अपना बल...

 
 
 
 
 
 
 
 
 
नीड़ के निर्माण में,
कभी तूफ़ान में , कभी गर्म थपेड़ों  में...
कभी अनजानी राहों से...
कभी दहशत ज़दा रास्तों से...
माँ से अधिक तिनके उठाए नन्हें चीड़ों  ने...
देने का तो नाम था...
उस देय को पाने के नाम पे...
एक बार नहीं सौ बार शहीद हुए॥
शहादत की भाषा भी नन्हें चीड़ों  ने जाना॥
समय की आंधी में बने सशक्त पंखो को
माँ सा दर्द लेकर सीने में
फैलाया माँ के ऊपर...

 
युवा बना नन्हा चिड़ा...
झांकता है नीड़ से बाहर,
डरता है माँ चिड़िया  के लिए...
"शिकारी के जाल के पास से दाना उठाना,
कितना खतरनाक होता है...
ऐसे में स्वाभिमान की मंजिल तक पहुँचने में 
जो कांटे चुभेंगे उसे कौन निकालेगा?"
चिड़िया  देखती है अपने चीड़ों  को
उत्साह से भरती है, ख्वाब सजाती है, चहचहाती है...
"कुछ" उडानें और भरनी हैं...
यह "कुछ" अपना बल है... 
फिर तो...
हम जाल लेकर उड़ ही जायेंगे...
**************
- रश्मि प्रभा

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19 Responses to रश्मि प्रभा की कविता - अपना बल...

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. बहुत ही भावपूर्ण निशब्द कर देने वाली रचना . गहरे भाव.

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  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  4. maa pehli shikshak hoti hai... ladne ka bal... aatmsamman aur sanskar maa se hi aate hain... aur maa... chahe chidiya ho ya manushya maa ke bhav maa se hi hote hain... samvedna bhari kavita....

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  5. atyant gahree abhivyakti, shubhkaamnaayen.

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  6. ek shiksha prad rachna
    need/chida aur maa ka
    relation achche se
    nibahya di aapne

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  7. Reshmi prbha.bhut hi payri or paviter kavita likhi h.Dil se dhanyabad.
    NARESH MEHAN

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  8. सवयं के बल पर ही सब संभव है....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  9. कविताओँ का संवेदन पक्ष प्रभावित करता है मगर कला पक्ष [बुनघट] पर ध्यान देने की दरकार है। खैर! मुखरित होने व सतत सिरजन हेतु बधाई !
    -ओम पुरोहित 'कागद'
    omkagad.blogspot.com

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  10. बहुत खूब, प्रेरणादाई कविता.

    विकास पाण्डेय

    www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

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  11. bahut sundar bhavon se saji kavita.......badhayi.

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  12. Yeh Ek Maa ka Bal hai, jo apne chido main pal pratipal bharti hai... ha "कुछ" उडानें और भरनी हैं...यह "कुछ" अपना बल है... फिर तो...हम जाल लेकर उड़ ही जायेंगे...Ilu

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  13. गहरे अहसास भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  14. ahsaaso ki sunder abhivaykti..maa maa hai wo bache ko sakaratmak soch dene ko tatpar rahti hai

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  15. प्रेरक रचना के लिये बधाई.

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  16. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना! बहुत बहुत बधाई!

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  17. भावपूर्ण अभिव्यक्ति. बधाई !

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