ओम पुरोहित ’कागद’ की होली


ओम पुरोहित ’कागद’ की होली की इन रचनाओं के साथ-साथ होली की सबको राम राम और हार्दिक शुभकामनाए......
 

१.
अब
कैसे रंगू
रंगों से
चेहरा तुम्हारा
असर करता नहीं
रंग हमारा
रंग है नकली
नकली है
चेहरा तुम्हारा

२.
होली तो
हो ली
अब
रंगों में
रंगत नहीं है
कान्हा-राधा सरीखे
सखा-सखी की
पंगत नहीं है 

३.
तुमको
रंगू तो
रंगू कैसे
होली की
क्या बात करते हो
तुमतो गिरगिट को भी
मात करते हो 

४.
यूं तो
इस दुनिया में
रंग बहुत है
लाऊं कहां से पानी
कुओं में
भंग बहुत है
हम हैं जिन्दा
लोग तंग बहुत है 

५.
सुना-पढा है
होली जला दी थी
भक्त प्रह्लाद ने
फिर
कैसे जिन्दा हो गई
इतना बाद में 

६.
चूल्हा मांगे गैस
चाय मांगे चीनी
रोटी मांगे दाल
ऐसे में
याद ना आता
गाल-गुलाल
लाल-गुलाल
कान्हा तेरी होली
तू ही सम्हाल! 

७.
रसोई करे पुकार
बीवी मांगे पैसा
हम हो जाते लाचार
वह हो जाती है लाल
हम पीले हो जाते हैं
इस तरह
हमारे होली के दिन
रंगीले हो जाते हैं 
**************

- ओम पुरोहित ’कागद’

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10 Responses to ओम पुरोहित ’कागद’ की होली

  1. कागद भाई की क्षणिकाओं में पूरी बात समाई
    ऐसा कुछ अंदाज़ रहा कि समझ सभी को आई।
    आनंद आ गया।

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  2. vah vah !

    holee to ho lee par sare kuon me bhang padee hai .jag to baurana hee rahega

    ReplyDelete
  3. सुनील जी, नरेन्द्र जी आदाब.

    आपका ये प्रयास निरन्तर सफ़लता की और अग्रसर है...इसके लिये बधाई.
    कागद साहब को उनकी सुन्दर रचनाओं के लिये बधाई.
    आखर कलश परिवार को एक बार फिर होली की शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
  4. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  5. चूल्हा मांगे गैस
    चाय मांगे चीनी
    रोटी मांगे दाल
    ऐसे में
    याद ना आता
    गाल-गुलाल
    लाल-गुलाल

    SUNDER PANKTIYAA

    ReplyDelete
  6. wah wah , naya pan liye sunder vyangyaabhivyakti.

    ReplyDelete
  7. रंग हमारा
    रंग है नकली
    नकली है
    चेहरा तुम्हारा
    क्या बात है!! बहुत सुन्दर. बधाई.

    ReplyDelete
  8. कविता, कहानी,व्यंग्य , संस्मरण.....आपने लगभग तमाम विधाओं को समेटने का सार्थक प्रयास किया है......यथासमय बहुत कुछ पढ़ डाला...

    आपको लोगों का रचनात्मक सहयोग. भी मिला है......
    अच्छा लगा यहाँ आना....अब बार-बार आना होगा.

    एक नेक काम के लिए शुभ कामनाएं !

    ReplyDelete
  9. ७.
    रसोई करे पुकार
    बीवी मांगे पैसा
    हम हो जाते लाचार
    वह हो जाती है लाल
    हम पीले हो जाते हैं
    इस तरह
    हमारे होली के दिन
    रंगीले हो जाते हैं

    बहुत सुन्दर. बधाई!

    ReplyDelete
  10. aap ne to dil he rang diya. BADHAI HO !!!!
    MASTAN SINGH
    BLOG= penaltystroke.blogspot.com

    ReplyDelete

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